शनिवार, 22 अक्टूबर 2022

ट्रांसजेंडर सोशल एक्टिविस्ट सिमरन सिंह के साथ डॉ. मिलन बिश्नोई की बातचीत

                       

                                                अस्तित्व की तलाश में सिमरन
1. नमस्कार सिमरन,मैं आपके बचपन के जीवन और पारिवारिक पृष्ठभूमि के बारे में जानना चाहती हूँ। सिमरन - मेरा जन्म साधारण परिवार में हुआ था । मेरे पिताजी अपने व्यसाय के साथ नीजि कम्पनी में मशीन ऑपरेटर की नौकरी भी किया करते थे। मेरा परिवार पारम्परिक होने के साथ-साथ रूढ़ीवादी बातों में यकीन करता है । जैसाकि मैं अपने परिवार की पहली संतान हूँ और मेरे जन्मोंत्सव पर बहुत खुश थे । जैसे-जैसे मैं बड़ी हुई ओर उन्हें पता चला कि मैं एक किन्नर हूँ,तो उनका मेरे प्रति रवैया ही बदल गया। उनकी पितृसत्तात्मक सोच के कारण वे मुझे अपनाने से कतराने लगे । मेरे सद्गुण और अच्छे काम को भी कोई महत्व नहीं दिया,बल्कि उनकी नजर में मेरा किन्नर रूप में पैदा होना अभिशाप बन गया । 
2.सिमरन, आपको किन्नर होने का अहसास कब और कैसे हुआ? 
सिमरन- मुझे किन्नर होने का अहसास कभी नहीं हुआ । बालक जब तक नासमझ होता है, तब तक धर्म, जाति, लिंग के बारे में कुछ नही जानता । क्योंकि अपनी वास्तविकता यानि लिंग के बारें में जानने और समझने में वक्त लगता है । उसे धीरे-धीरे उम्र और अनुभव के साथ समाज में रहने और झेलने से पता चलना शुरू होता है, वैसे ही मेरे दिमाग लिंग का द्वंद चलने लगा कि मैं कौन हूं? मैं अलग क्यों हूँ । जैसाकि जब से मैं समझने लगी तब स्वयं को लड़की की तरह महसूस करती हूँ और मानती भी हूँ । मुझे लड़कियों की तरह सजना-संवरना और उनके साथ रहना अच्छा लगता था । वैसे घर में भी शुरूआती दौर में कोई रोक-टोक नहीं थी । जैसे-जैसे मैं बड़ी होने लगी तब से मुझे कैसे उठना-बैठना ओर किसके साथ रहना है,यह सब घरवाले तय करने लगे । तब मुझे लगने लगा कि मैं अन्य लोगों से भिन्न हूँ ।
 3. आप दिखने में संपूर्ण महिला जैसी ही है, फिर भी डॉक्टर/चिकित्सक के अनुसार आप में कौनसी कमी है? सिमरन - दिखने में एक संपूर्ण महिला की भांति हूँ लेकिन डॉक्टर के अनुसार मुझमें प्रजनन की क्षमता नहीं है । बस मेरी आवाज़ थोड़ी भारी है लेकिन मुझमें बाकी सारी भावनाएँ और शरीर महिलाओं की तरह है ।
 4.क्या आपके माता-पिता ने बचपन में लैंगिक विकास की कमियों को देखते हुए इलाज करवाने की कोशिश की थी?
 सिमरन- मेरी शारीरिक समस्याओं को जानते हुए भी माता-पिता चिकित्सक के पास मुझे ले जाना जरूरी नहीं समझा । जबकि हमारे पारिवारिक डॉक्टर ने मेरी लैंगिकता के बारें में सचेत किया था। मेरी माँ ने जानबूझकर अनदेखा किया । उन्हें मेरी आवश्यकता नहीं थी क्योंकि उनके पास मेरे अलावा बेटेऔर बेटियां थी । इसलिए शायद उन्होंने मुझे मेरे हालातों पर छोड़ दिया ।
 5. सिमरन! आपको सामान्य बालक और किन्नर बालक में क्या असमानता देखने को मिली? खासकर मैं शारीरिक असमानता के बारें में जानना चाहती हूँ । 
सिमरन- मैं अभी एक लड़के-लड़कियों असमानता को जानती हूँ लेकिन किन्नरों की शारीरिक भिन्नता को अभी तक समझ नहीं पाई कि उनमें क्या असमानता होती है । बस यह जानती हूँ कि उनका लैंगिक विकास पूर्ण से नहीं होता और प्रजनन क्षमता नहीं होती है।
 6.सिमरन,वर्तमान में वैज्ञानिक और आधुनिक चिकित्सक तकनीकि से सर्जरी करके किन्नरों को अपना दैहिक अस्तित्व प्रदान किया जा रहा है?
 सिमरन- जी हाँ आधुनिक चिकित्सालय में कुछ ऐसी शल्य क्रियाएँ हैं,जिसके माध्यम से किन्नर पूर्ण रूप से महिलाओं का अस्तित्व प्राप्त कर सकते हैं । किंतु उनमें प्रजनन करने का क्षमता नहीं होती है । और यह शल्य क्रियाएं काफी महंगी होती है जो सारे किन्नर आर्थिक रूप से सक्षम नहीं होते है। इसलिए इन सुविधाओं का लाभ नहीं ले सकते । 
 7.सिमरन,बस ओर ट्रेनों में नकली किन्नरों का प्रकोप बढ़ता जा रहा है और वे कई बार अमानवीय व्यवहार भी करते है । उनके रोकथाम हेतु क्या कदम उठाने चाहिए ? 
सिमरन- आप लोगों का डर उनका हथियार बन गया है । वास्तव में बस और ट्रेन में कुछ किन्नर और कुछ नकली किन्नर अमानवीयता हरकतें करते हैं,मैं उनसें सहमत नही हूँ । सरकार और पुलिस को उनके प्रति कानूनी कदम उठाने चाहिये। 
8.सिमरन,किन्नरों के पास नृत्यकला का हुनर और उनका वजूद भी है।क्या किसा ने इसे राष्ट्रीय स्तर तकपहचान दिलाने की पहल की है? 
सिमरन- जी हाँ कुछ लोगों ने कोशिश की है लेकिन मैं उनसे संतुष्ट नहीं हूँ सबका अपना स्वार्थ है । हमें आगे बढ़ने की स्वयं पहल करनी होगी... लोग हमें मनोरंजन का साधन समझते है। 
9.आपको मैंने नृत्य करते हुए देखा था इसलिए जानना चाहती हूं कि नृत्यकला कहाँ से सीखी ? सिमरन- मैंने नृत्यकला फिल्मों में अभिनय करते हुए कलाकारों को देखकर सीखा है । और सच कहूं तो हालात सब कुछ सीखा देता है। 
10.सिमरन,उत्तरप्रदेश सरकार और केंद्र सरकार से आपको कोई सुविधा मुहैया करवायी गयी है? 
सिमरन- नहीं जी...उत्तरप्रदेश सरकार ने हमें अभी तक कोई सुविधाएं उपलब्ध नहीं करवायी । हाँ केंद्र सरकार द्वारा ट्रांसजेंडर बिल पास हो जाने के कारण कुछ राहत अवश्य मिली है ।
 11.सिमरन,क्या किन्नर गुरू अपने शिष्यों के साथ सदैव न्यायपूर्वक सम्मान देते है? सिमरन-जी ये हालातों पर निर्भर करता है उनके साथ न्यायपूर्वक व्यवहार करते है या नहीं । वैसे ज्यादातर ना ही जवाब होता है। 
12.सरकार ने ट्रांसजेंडर बिल पास किया है, आपके क्षेत्र में उसकी जागरूकता को लेकर कोई अभियान चलाया जा रहा है? सिमरन-जी, हमारे क्षेत्र में ऐसा कोई भी अभियान नहीं चलाया गया ।
 13.सिमरन,वर्तमान में किन्नरों के लिए कई सारी योजनाएँ है जिससे किन्नरों को रोटी,कपड़ा,मकान आसानी से मिल सकता है।क्या आप उन सुविधाओं से लाभान्वित हुई है ।
 सिमरन- जी मुझे अभी तक किसी प्रकार की योजनाओं का लाभ नहीं मिला और मैंने कोशिश भी नहीं की ।
 14.सिमरन, आम भारतीय नागरिक की भांति किन्नर समाज को भी सरकार ने अधिकार दिए हैं फिर भी आप लोग इन अधिकारों से वंचित क्यों हैं? सिमरन-मेरा मानना है कि किन्नर समाज अशिक्षित होने के साथ-साथ समाज से भी उपेक्षित है इसलिए आज भी वे अपने मूल अधिकारों से वंचित रह रहा है । 
15.बधाई माँगने की परम्परा किन्नरों की सदियों से चली आ रही हैं लेकिन 21 वीं सदी में इस बधाई परम्परा की स्थिति के बारें बता सकती है?
 सिमरन-वर्तमान में कुछ किन्नरों के लालची स्वभाव के कारण किन्नर समुदाय और किन्नर परम्परा दोनों बदनाम हो रहे हैं । लेकिन यह परम्परा आज भी चल रही है और सदियों से चली आ रही है । मुझे आज भी अपनी परम्परा पर गर्व है।
16 सिमरन, आपका कोई विशेष संदेश शोधार्थियों के लिए.....
सिमरन- मैं उन तमाम शोधार्थियों को हार्दिक बधाई देती हूँ...जो इस हाशियाकृत समुदाय पर काम करने के लिए आगे आए । इस समुदाय की यथार्थपरक समस्याओं को देखते हुए काम करें तो अच्छा होगा । कुछ अपवाद और भ्रांतियाँ समाज में चर्चित है उनसे बचकर कर तटस्थता के साथ काम करेंगे तो यह समय हमारे लिए बहुत बदलाव लाने सहयोगी होगा । आपका विशेष आभार ...मुझसे जुड़ने और कुछ नया जानने का प्रयास किया मेरा आपको विशेषरूप से  आशीर्वाद । 

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