बिश्नोई पंथ के 538 वें स्थापना दिवस की समस्त देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं 🙏 हमारी सनातन संस्कृति में धर्म का अर्थ है -'धारण करने से' और हमारे गुरुदेव ने बिश्नोई पंथ की स्थापना करके हमें मनुष्यता को बनाएं रखने के लिए क्षमा,दया और प्रकृति के प्रति प्रेम को धारण करना सिखाया।
इन सबके साथ पारिस्थितिकी संतुलन हेतु वन्यजीव और वृक्षों को बचाएं रखने की शपथ दिलाई। अर्थात् इसलिए आधुनिक काल (कलयुग) में भी गुरुजी की वाणी और बिश्नोई पंथ की प्रासंगिकता बनी हुई है ।आज अधिकांश जनता 'अंग्रेजी के परम्परा के पथचालक' जीव-जानवर,पशु-पक्षियों को "zoo" अर्थात् "जानवर कैद गृह" में देखने जाते हैं और इस पंथ के अनुयायियों के घरों में उनका संतान की तरह पालन-पोषण किया जाता है।
हम (बिश्नोई) बड़े सौभाग्यशाली है कि इस विचारधारा/समझ के साथ जन्म लेने का सौभाग्य मिला। आंख खुलते ही हमें क्षमा,दया, प्रेम और प्रकृति के मंत्रगान सुनाये जाते हैं। मद,मोह,लोभ के नशे से दूर सात्विक आचरण व जीवन शैली और जीवन शुद्धता का पाठ पढ़ाया जाता है। शायद इसीलिए इस समाज के लोग आज भी मनुष्य, प्रकृति और वन्यजीव के प्रति सबसे अधिक वफादार और निष्ठावान हैं।
आधुनिकता की होड़ में अपनी संस्कृति और जमीनी संवेदनाओं से जुड़े रहने वाले ही 'बिश्नोई' है। वरना बिश्नोई पंथ में पैदा होने से बिश्नोई नहीं कहलाता। वे सभी बिश्नोई है जिनमें गुरुजी बतायी हुई वाणी अनुरूप जीने की ललक है।
बिश्नोई का नैतिक ध्येय - पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण
#कुछ लोग जानवर खाने के लिए मरते हैं...और हम पर्यावरण और वन्यजीव बचाने के लिए मरते हैं बस इतना-सा "बिश्नोई" होने में फर्क है।
#DrMilanBishnoi #363बिश्नोईशहीद #अमृतादेवी #शहीदमंडली
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