बुधवार, 15 मार्च 2023

नाचो-नाचो : हाथी की सरगोशियाँ-आचार्य ऋषभदेव शर्मा

 


#डेलीहिंदीमिलाप

जी, हाँ! नाचना तो बनता है। आखिर भारतीय फिल्म 'आरआरआर' के गाने ‘नाटू नाटू’ ने और शॉर्ट फिल्म 'द एलिफेंट व्हिस्परर्स' ने ऑस्कर अवॉर्ड जीत कर भारतीय सिनेमा को ऐतिहासिक और गर्व का अवसर प्रदान किया है न!  कोई इसमें भारत का जलवा देख रहा हैं, तो किसी को दुनिया भर में भारतीयता का डंका बजता सुनाई पड़ रहा है। यह भारत की मौलिकता और आत्मीयता की वैश्विक स्वीकृति का जीता जागता प्रमाण है। इसलिए अगर सब तरफ उत्सव जैसी उमंग है, तो उचित ही है। 

असल में, अमेरिका के लॉस एंजलिस स्थित डोलबी थियेटर में संपन्न 95वें ऑस्कर अवॉर्ड  के ऐतिहासिक समारोह ने भारतीय सिने प्रेमियों को खुशी का दोहरा अवसर दिया है।  मूल रूप से तेलुगु में बनी फिल्म 'आरआरआर' के गाने ‘नाटू नाटू’ ने ‘ओरिजनल सॉन्ग’ कैटेगरी में आस्कर अवॉर्ड जीता है। सच कहा जाए तो  ऑस्कर अवॉर्ड के इस 95वें संस्करण में ‘नाटू नाटू’ के रूप में भारत ने दूसरा ऑस्कर जीता। इससे पहले भारत ने इतिहास रचते हुए 'भारतीय प्रोडक्शन' के लिए पहला ऑस्कर अवॉर्ड जीता। भारतीय फिल्म 'द एलिफेंट व्हिस्परर्स' ने 'शॉर्ट फिल्म डॉक्यूमेंट्री' कैटेगरी में ऑस्कर अवॉर्ड हासिल किया। कहना न होगा कि इन दोनों फिल्मों ने पूरे विश्व में देश का गौरव बढ़ाया है। इस खुशखबरी से  भारत और दुनिया भर में फैले भारतीय सिने प्रेमियों को तो गर्व का अवसर मिला ही है, अवॉर्ड जीतने के बाद फिल्म निर्माताओं की भी खुशी का ठिकाना नहीं है। खुशी का ठिकाना ऐसे भी बहुत से लोगों का भी नहीं है, जो सिनेमा के प्रति भले ही उदासीन रहते हों लेकिन देश को गौरव दिलाने वाली हर चीज़ उन्हें रोमांचित करती है।

ऑस्कर तो पहले भी भारतीयों को मिला है, लेकिन इस बार का ऑस्कर इसलिए विशेष और ऐतिहासिक है कि यह किसी 'भारतीय प्रोडक्शन' के लिए अब तक का पहला ऑस्कर है! जैसा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बधाई देते हुए कहा है, ‘नाटू नाटू’ की लोकप्रियता वैश्विक है। यही बात ‘द एलिफेंट व्हिस्परर्स’ के लिए भी सच है। इस प्रतिष्ठित सम्मान से समूचा भारत प्रफुल्लित और गौरवान्वित है। 

ये फिल्में भले ही तेलुगु और तमिल भाषा में बनी हों, लेकिन इनकी वैश्विक प्रतिष्ठा ने यह साबित कर दिया है कि कला के आवेग के सामने  भाषा, देश और काल की हदबंदियाँ ढह जाती हैं। सही कहा जा रहा है कि ‘नाटू नाटू’ एक वैश्विक घटना बन गया है और यह सबूत है कि एक अच्छी कहानी, साथ ही एक बेहतरीन गीत भाषा और सीमाओं को पार कर सकता है।

 अब ये कलाकृतियाँ समूची  मनुष्यता के  आनंद का हेतु हैं। लेकिन यहाँ यह भी कहना ज़रूरी है कि भारत की इन सिने कलाकृतियों को सम्मानित करके ऑस्कर देने वाली अकादमी ने भी अपनी हदबंदियों को ढहाया है। इससे उसकी अपनी विश्वसनीयता बढ़ी है, जो पिछले कुछ वर्षों में सवालों और विवादों के घेरे में आ गई थी। अकादमी ने भारतीय और एशियाई लोगों के नामांकन बढ़ाकर एक बड़े दर्शक समूह को ऑस्कर से जोड़ने की कोशिश की है। उम्मीद की जानी चाहिए कि आने वाले वर्षों में इसके और भी सुखद परिणाम देखने को मिलेंगे तथा भारतीय सिने उद्योग की प्रतिष्ठा और बढ़ेगी।

अंततः एक बात और। सैन्य शक्तियों से दुनिया भर को हलकान करने की वैश्विक महाशक्तियों की गलाकाट स्पर्धा के इस युग में भारत अपने विश्वगुरुत्व की स्थापना जिस 'सौम्य शक्ति' (सॉफ्ट पॉवर) के बल पर कर सकता है, भारतीय सिनेमा की मौलिकता की यह पहचान उसका भी एक नमूना है। अहिंसा और योग ही नहीं, हमारी कलाएँ और फिल्में भी हमारी वह सॉफ्ट पॉवर है, जो कूटनीतियों के तुमुल कोलाहल कलह में विश्व-मानव के हृदय से हृदय की बात कर सकती है! 000

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