मंगलवार, 11 फ़रवरी 2020

My society is getting clouded

मेरा समाज धूमिल हो रहा-
आज अपने प्रांत से मीलों दूर बैठी हूं, यहां के युवाओं को आगे बढ़ते देख रही हूं और उनसे कुछ  प्रेरणा लेकर आगे बढ़ने की कोशिश भी कर रही हूं । फिर भी मन बड़ा चंचल है, यह हमेशा मुझे अपने अतीत की ओर ले चला जाता है। जब मैं अपने अतीत में जाती हूं तो राजस्थान के इतिहास और संस्कृति के पन्नों को पलटते हुए भविष्य की और भी झांकती हूं। तब मुझे अपने इतिहास में दादू,मीरा,राणाप्रताप,वीरदुर्गादास, पृथ्वीराज चौहान,वीर तेजाजी,अमृता देवी, पन्नाधाय,हाडी़ रानी,गुरु जम्भेश्वर, गुरु जसनाथ, रैदास,बाबा रामदेव इत्यादि महान नर-नारी और महापुरुष दिखाई देते हैं। वे सिर्फ दिखाई ही नहीं देते बल्कि उनके संघर्ष और बलिदान की गाथा सुनाई देती है। प्राय: हम अपने आप को उन्हीं महापुरुषों की संतान मानते है, तो फिर हमारा फ़र्ज क्या बनता है? महापुरुषों की औलाद आज किस दिशा में जा रही हैं? इसकी चिंता मुझे भविष्य के पन्नों में दिखाई दे रही है। यह चिंता पिछले चार-पांच सालों से परेशान भी कर रही है। फिर भी अपने प्रांत से बाहर निकलकर शिक्षा प्राप्त करने चली आई हूं तो कई बार उसे इग्नोर भी करने लगी। लेकिन वास्तविकता यह है कि हम मनुष्य की स्मरण शक्ति और लगाव शक्ति इतनी कमजोर नहीं है कि इन्हें आसानी भूला दिया जाए। बस इस कशमकश में अपने आप को ढालती चल रही हूं। लेकिन आजकल सोशल मीडिया से कौन दूर है । सोशल मीडिया ने हम सबको जोड़कर/ जकड़कर रखा है कि उससे कोई अछूता नहीं रहा। अगर सोशल मीडिया का सही इस्तेमाल करना आए तो यह जकड़न हमारी जिंदगी बना देती है। लेकिन रोना इस बात का है कि मेरे समाज में इस सोशल मीडिया का कुछ लोग सदुपयोग और दुरुपयोग दोनों कर रहे है।सच कहूं तो ग्रामीण स्तर पर इसका सबसे ज्यादा दुरुपयोग भी हो रहा है। महिलाओं के साथ इसका बड़ा अन्याय भी हो रहा है। पढ़ें लिखे युवा लोग मां-बहनों के फोटोज का इतना नीचे स्तर पर गिर कर गलत इस्तेमाल करने लगे है। मुझे यह समझ नहीं आ रहा । फिर भी उनके पास क्या यही काम बचा? जो महिलाओं के फोटोज का छेड़छाड़ करके वायरल कर रहे। उनके अपने घर में भी बहन-बेटी है फिर यह तुच्छ हरकतें क्यों ? दूसरी तरफ मेरे समाज की महिलाओं में लगभग यह पहली पीढ़ी है जो व्हाटसेप, फेसबुक, इंस्टाग्राम का इस्तेमाल कर रही है। महिलाएं भी कई बार फ्री phone call और कैमरे का गलत इस्तेमाल करती दिखाई दे रही है। इससे अपने आप की और खानदान की बदनामी मोल ले रही है ...ऐसा करने की क्या आवश्यकता है? अपने ही पतियों को धोखा देकर अन्य पुरूषों और साधुओं के साथ गंदी बातें/व्यवहार करने लग जाती है ।इसके पीछे की मानसिकता समझना फिलहाल मेरे वश में नहीं है। फिर भी मैं कहूंगी कि हमें समाज और परिवार की मर्यादा बनाए रखनी चाहिए । हमें अपनी स्वतंत्रता का सही सदुपयोग करना चाहिए। अपनी स्वतंत्रता को देशहित,समाज हित और स्वयं के हित में लगा दो। दूसरी बात पर आपका ध्यान गया होगा गैंगस्टर आज शादियों और सामाजिक स्थल पर बंदूक लेकर नाच रहे हैं और सोशल मीडिया पर उनके वीडियो वायरल हो रहे है यह सब क्या शुरू हो गया? और उनके ग्रुप में स्मेकिंग, चोरी-डकैती, लड़ाई-झगडे़ वाले विडियोज खूब धमाल मचा रहे हैं। सोचने वाली बात है हमारे समाज में आज से 40-50 पहले बहुत कम पढ़े लिखे और नौकरी में एक-दूके लोग मिलते थे। फिर भी यकीन मानिए समाज में भाईचारा, एकता, सहनशीलता, समर्पण,त्याग और सम्मान की भावनाएं कूट-कूटकर भरी हुई थी।अर्थात् वीर तेजाजी, रामदेव,जांभोजी और जसनाथजी के अनुयायी पर्यावरण प्रेमी और वन्यजीवों के रक्षक माने जाते है। वाकई उनके बलिदान की गाथा सुनकर हर कोई अचम्भित रह जाते है। लेकिन उनके अनुयायियों को देखकर गर्व भी होता वहीं वर्तमान में दुःख भी... दुःख इस बात का होता है कि ऐसे महापुरुषों के अनुयायियों में कुछ लोग  को पर्यावरण प्रेमी बनने/कहलाने की बजाय गेंगस्टार, मास्टरमाइंड, डकैत और लूटेरा बनाना/कहलाना पसंद कर रहे है। हमारे पढ़ें- लिखे युवा भी ऐसे लोगों का धड़ल्ले से स्वागत-सत्कार भी करते हैं ।वे आज स्मेकिंग,दारू,एमडी,ड्रग्स इत्यादि नशीली आदतों के शिकार हो रहे हैं।क्या लगता नहीं ऐसे अराजक तत्व (लोग) हमारे समाज को धूमिल कर रहे हैं।वे लगातार अपनी संख्या बढ़ा रहे हैं। इससे सबसे बड़ा नुक़सान समाज- संस्कृति और मां-बेटियों को हो रहा है। इससे दिन ब दिन हमारे समाज की बदनामी हो रही है । समाज में लगातार अराजक तत्व पैदा हो रहे जिससे तलाक और संबंध विच्छेद होने के आंकड़ों में भारी बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। कभी लगता नहीं कि पुराने जमानों में हमारे पास संसाधनों की कमी थी फिर भी हर एक इंसान अपनी जीविका ईमानदारी पूर्वक बिताता था। आज जमीन जायदाद और अन्य संसाधन और शिक्षा की उपलब्धता के बावजूद भी युवा गुमराह हो रहे हैं । खैर आज बस.....
क्रमशः
@ मिलन बिश्नोई
10.02.2020

2 टिप्‍पणियां:

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