हमें आस्थावान होना चाहिए इसमें कोई बुराई नहीं है । मंदिर में पूजा-अर्चना करना कोई गुनाह भी नहीं है । लेकिन मां-बाप रूपी ईश्वर को घर से निकाल देंगे तो भगवान ना मंदिर में मिलेगा ना ही इस लोक में । ऐसे न जाने कितने लोग सड़कों पर भीख मांगते हुए हमें दिखते है । यह भीख क्यों मांगते इसका कारण हम नहीं जानते है क्योंकि हमने कभी प्रयास भी नहीं किया । यह बुढ़ी दादी कल मेरा हाथ पकड़ रोने लग गई । उन्हें इतनी जोर से भूख लगी थी।उनको ना पहनने को चप्पल है ना कोई झोला । बस पेट रूपी झोले को भरने के लिए पता नहीं कितनी बार सड़क पर हाथ फैलाने से इनको भोजन की कीमत मिलती होगी । खैर मैं कोई बड़ी हस्तियों में से तो नहीं हूं जो इन लोगों की समस्याओं का समाधान कर सकूं । बस इनको रेस्टोरेंट में ले गई और चाय वाय पिलाई और कुछ पैसे दिए तो यह मुझे पूछने लगी तुम्हें चाय नहीं पीना ? मैंने कहा नहीं अम्मा । तब तक मुझे कोई कहने लगा "इनको मुंह मत लगाओ यह लोग ऐसे ही करते है।" पर सच कहूं तो यह ऐसे ही भीख मांगते नहीं इनकी भी मजबूरी है । हां कुछ लोग ऐसे भी करते होंगे । लेकिन बस एक ही गुजारिश है कि बुजुर्ग माता-पिता, दादा-दादी, नाना-नानी का ख्याल रखें । क्योंकि इनकी कमाई हम खा लेते हैं और फिर इनका हाथ काटकर छोड़ देते तो यह भीख नहीं मांगेंगे तो क्या करेंगे। गांव और शहरों में 500 रू की पेंशन तक बेटे और बहू इनकी छीन लेते हैं । हर रोज लड़ाई-झगडा करते इसलिए इन्हें मजबूर होकर भीख मांगना पड़ता है। इनके दुःख दर्द को हम समझने की आज कोशिश नहीं करते हैं।यह भूल जाते है कि आज हम जवान भले ही है आने वाला कल हमारा भी यही होगा। जैसा आज हम कर रहे वैसा ही हमारी संतान करेंगी। कोई मायने नहीं रखता कि आज आप किस पद और प्रतिष्ठा पर स्थापित है ।बुढापा सबका समान है उसमें आपकी पद-प्रतिष्ठा नहीं देखी जाती है क्योंकि स्वार्थी संतान दिन ब दिन राक्षसी प्रवृत्ति अपना रही है। बेशक आज भी हर घरों में बुजुर्ग शोषित नहीं हो रहे । लेकिन गांव और शहरों में संख्या लगातार बढ़ रही है इसलिए सोचिएगा और निस्वार्थ सेवा भाव से अपनाएं।
नोट - मैं ना समाज सेविका हूं ना ही कोई बड़ी राजनेता,लेखक या ओहदेदारों में से.... इत्यादि लेकिन मुझे ऐसे बुजुर्ग और असहाय लोगों की छोटी-छोटी मदद करना अच्छा लगता है ।
-मिलन बिश्नोई
4/3/2019
नोट - मैं ना समाज सेविका हूं ना ही कोई बड़ी राजनेता,लेखक या ओहदेदारों में से.... इत्यादि लेकिन मुझे ऐसे बुजुर्ग और असहाय लोगों की छोटी-छोटी मदद करना अच्छा लगता है ।
-मिलन बिश्नोई
4/3/2019



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