Milan Bishnoi
Research Scholar, Department of Hindi
Central University of Tamilnadu.
Gmail- milanbishnoi@gmail.com
A talk With 'Transgender welfare Board Haryana's President Mai Manish Mahnt (10th May 2019)
1. मिलन बिश्नोई - आपके बारें में बहुत कुछ सुना लेकिन मैं आपके
जन्म स्थान, परिवार और शिक्षा के बारें में जानना चाहती हूं ?
माई
मनीषा महंत - मेरा जीवन बिल्कुल देसी
देहाती है। हालांकि मेरा जन्म ओर शुरूआती पढ़ाई हरियाणा के करनाल शहर में
हुई,लेकिन उसके बाद जीवन में बहुत सारे उतार-चढ़ाव देखते हुए मैं हरियाणा के गुहला-चीका
जिला कैथल के गाँव भून्ना में आ गई ओर आज गद्दीशीन गुरू मंगलमुखी किन्नर समाज की
हैसियत से यहीं पर रहती हूँ। करनाल में मेरे मम्मी-पापा के अलावा परिवार में चार
बहन-भाई ओर थे ओर मैं एक मध्यवर्गीय परिवार से ताल्लुक रखती हूँ।
2. मिलन बिश्नोई -
दीदी आप माँ का हमेशा जिक्र करती हो और फिर अपनी माँ से दूर क्यों रहना पड़ता है?
माई
मनीषा महंत - मैं समझती हूँ कि
शारीरिक दूरी जितनी पीड़ादायक होती है,वहीं आत्मिक मिलन उतनी ही संतुष्टि देता है
ओर मेरा मेरे परिवार के साथ कुछ ऐसा ही अनुभव है। रही बात माँ से दूर रहने की तो
ये एक घृणित सामाजिक प्रथा है,जिसका धीरे-धीरे अंत हो रहा हैं, ये परम्परा अब दम
तोड़ रही है। उम्मीद करते हैं कि भविष्य में किसी को ये सब अनुभव नहीं करना
पड़ेगा।
3. मिलन बिश्नोई -
आप भी एक माँ के रूप में दो बच्चियों का पालन-पोषण कर रही है तो इन्हें गोद लिया
तब समाज और सरकार के साथ आपका संघर्ष कैसा रहा?
माई
मनीषा महंत - हाँ! माता रानी की कृपा से मैं दो बेटियों की माँ हूँ ओर किन्नर रूप में माँ
बनना अपने आप में जीते जी स्वर्ग की अनुभूति करने जैसा है। रही बात दो-चार घटिया
मानसिकता के लोगों को छोड़कर अन्य की बात करूँ,तो मुझे तकरीबन बहुत अच्छा रिस्पांस
मिला, सभी ने खुशी भी जाहिर की ओर मुझे सहयोग भी किया। हाँ!
कानूनी रूप से बहुत सारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा,लेकिन अब सब ठीक है। बल्कि
अब किन्नरों के बच्चा गोद लेने के मामले को लेकर कोर्ट जाने की तैयारी में
हूँ,ताकि जो परेशानियाँ मुझे सहन करनी पड़ी, भविष्य में किसी के साथ ऐसा न हो।
4. मिलन बिश्नोई -
आप कितने भाई-बहन हैं और क्या अब सभी आपसे मिलते रहते है?
माई
मनीषा महंत - हम पांच भाई-बहन हैं ओर
अब रिश्ते वैसे नहीं हैं। कभी कोई काम होता है या फिर सुख-दुख के समय ही मिल पाते
हैं । छोटी बहन की शादी से पहले रिशते बहुत अच्छे थे,लेकिन शादी के बाद उससे भी
कभी मिलना नहीं होता या फिर शायद वो सब अपनी-अपनी गृहस्थी में व्यस्त हैं। इससे ज्यादा
सोचने के सिवाय हम कर भी क्या सकते हैं।
5. मिलन बिश्नोई -
आप इतनी कम उम्र में किन्नर बोर्ड की अध्यक्ष बन गई...इस सफल संघर्ष के बारे में
जानना चाहती हूँ?
माई
मनीषा महंत - किन्नर बोर्ड की
अध्यक्ष बनने को मैं सफलता नहीं समझती,बल्कि ये जिम्मेदारी है।जो समाज ने हमारे कंधे
पर डाली है, सफलता तो तब होगी। जब हम अपने समाज को मुख्यधारा में लाकर खड़ा कर
देगें ओर तब मेरे समाज की पहचान ताली बजाना या घुंघरू बजाना नहीं,बल्कि उनकी
शिक्षा ओर उनका वो ओहदा होगा,जिस पर वो शिक्षित हो करके बैठेगें।
6. मिलन बिश्नोई- धारा 377 के बारें में आपकी क्या
राय है?
माई मनीषा महंत - मैं 377
पर कोई चर्चा करना
नहीं चाहती। क्योंकि मैं समझती हूँ कि जिन्होंने इसके लिए संघर्ष किया,बहुत अच्छा
किया। लेकिन मैं इस विषय पर कटु टिप्पणी करके किसी की भावनाओं को आहत नहीं करना
चाहती।
7. मिलन बिश्नोई -
आजकल किन्नर अखाड़े बने है और मंडलेश्वर भी बनाये जा रहे तो इससे किन्नर समाज को
क्या फायदा होगा ?
माई
मनीषा महंत - बिल्कुल फायदा
होगा,किन्नर अखाड़ा ओर महामंडलेश्वर बनने से हमें हमारी खोई हुई वैदिक-सनातनी
पहचान वापस मिलेगी ओर किन्नर समाज धार्मिकता से जुड़ कर सात्विकता की ओर बढ़ेगा ।
हालांकि हम तो है ही जन्मजात के संत, हमें संत होने का सर्टिफिकेट भी नहीं चाहिए ।
लेकिन हमारी वास्तविक पहचान ही सनातन है । तो बिल्कुल ये ही एक हमारी अच्छी शुरूआत
है।
8. मिलन बिश्नोई - देश
में किन्नर बहुत कम पढ़े-लिखें हैं फिर भी उनके रोजगार के लिए क्या प्रावधान करने
चाहिए ?
माई
मनीषा महंत - बिल्कुल 99.9 किन्नर
समाज अनपढ़ है। सरकार को इन्हें शिक्षा से जोड़ने के लिए अनेकों योजनाएं उपलब्ध
करवानी होगी, ताकि आने वाली नस्लों का भविष्य सुनिश्चित हो सके ओर साथ ही इन्हें
शैक्षणिक,राजनीतिक एवं विशेष सामाजिक अधिकार भी देने होंगे । ताकि आम लोगों द्वारा
विभिन्न प्रकार से की जाने वाली इनकी प्रताड़ना पर रोक लग सके।
9. मिलन बिश्नोई - आने वाले वर्तमान समय और भविष्य में किन्नरों
की शिक्षा के बारें में आप लोग क्या सोच रहे है ...सरकार से कुछ मांग की गई है ?
माई
मनीषा महंत- बेशक हम चाहते है कि आने
वाली किन्नर पीढ़ी पूरी तरह शिक्षा एवं रोजगार से जुड़ी हुई होनी चाहिए। मैंने डॉ.
भीमराव अंबेडकरजी को पढ़ा है ओर मैंने समझा है कि अगर किसी भी पिछड़े वर्ग को
मुख्यधारा में लाना है तो उन्हें कुछ विशेषाधिकार देने ही होगें। वरना पहले की तरह
विकसित जातियां उनका यूँ ही शोषण ओर तिरस्कार करते रहेगी। जब तक किन्नरों को
राजनीति,शिक्षा एवं रोजगार में आरक्षण के रूप में विशेषाधिकार नहीं मिल जाते,ये तब
तक पिछड़े ही रहेगें। वर्तमान समय में किन्नर समाज अपना जो बधाई मांगने का कार्य
करता है, उससे छेड़छाड़ किए बिना,अगर हम नई पीढ़ी को शिक्षा से जोड़ने में कामयाब
हो जाते हैं तो ये बिल्कुल वैसा ही होगा जैसे हम ब्रिटानिया से कोहिनूर हीरा ले आए
हो। लेकिन विशेषधिकार के बिना ये संभव
नहीं है, क्योंकि किन्नरों को लेकर के लोगों की मानसिकता बहुत घृणित है।
10. मिलन बिश्नोई - साहित्य में किन्नर विमर्श
काफी उभरकर आया है आपकी इसके प्रति क्या धारणा है ?
माई मनीषा महंत - साहित्य एक ऐसा मंच है,जो मुर्दों को भी जिंदगी दे सकता
है। किन्नर विमर्श होना,यह इस बात का संकेत है कि हम सही रास्ते पर हैं। लेकिन अगर
किन्नर समाज साहित्य से जुड़ जाए तो सोने पे सुहागा वाली बात हो जाएगी। साहित्य के
जरिए लोग किन्नरों के प्रति सकारात्मक सोच भी अपना रहे हैं और उनकी भावनाओं को भी
समझ रहे हैं । कुल मिलाकर ये प्रयास भी सराहनीय है ओर किन्नर विमर्श पर कार्य करने
वाले सभी लोग बधाई के पात्र हैं।
11. मिलन बिश्नोई - आप भी कहानी और कविताएं लिखती है फिर अपनी आत्मकथा लिखने
के बारें में क्यों नहीं सोचा? अगर लिखोगें तो लोगों को सीखने व समझने
और पढ़ने का अवसर का मिलेगा।
माई
मनीषा महंत - कहानियाँ ओर कविताएं
लिखने का शौक मुझे बचपन से है, मेरे दिल की बात जो मैं किसी से साझा नहीं करना
चाहती थी।उन्हें मैं कहानी या कविता के रूप में लिख लेती थी, जिससे मेरे दिल का
बोझ कुछ हल्का हो जाता था। मेरी आत्मकथा के बारे में अभी सोचा नहीं है,अब आपने कहा
है तो इस पर भी जरूर विचार करेंगे।
12. मिलन बिश्नोई - किन्नर शब्द का अर्थ आप से समझना
चाहती हूँ क्योंकि किन्नर शब्द काफी विवादित रहा है. और हिजड़ा जैसे शब्दों का
प्रयोग करना मैं उचित नहीं समझती।
माई मनीषा महंत - किन्नर शब्द के साथ भी बहुत-सी भ्रातियाँ जोङ दी गई हैं
और हिजड़ा आम भारतीय शब्द नहीं है,बल्कि ये उर्दू ओर अरबी के मेल से बना है। तृतीयलिंगी
शब्द एक सांकेतिक शब्द है,जो स्पष्ट करता है कि जिस व्यक्ति के बारे में आप चर्चा
कर रहे हैं। वो पहले दो लिंग,पुरूष लिंग या स्त्री लिंग से भिन्न है। हालांकि
हमारे भारतीय ग्रंथों में किन्नरों को स्पष्ट रूप से ‘किन्नर’ ही कहा ओर
लिखा गया है। लेकिन फिर समय के साथ-साथ न जाने कब इस मुगलई शब्द ‘हिजड़ा’ ने अपनी जगह बना ली।वैसे भी इतिहास में भी
आपको किसी पात्र के पूर्ण मनुष्य न होने के संकेत मिले,तो आप समझ जाइए कि वहां
चर्चा किन्नरों के विषय पर ही है।
13. मिलन बिश्नोई - संघर्षमयी समय में किन्नर बच्चों
का मानसिक विकास किस तरह होता है।इन सब तकलीफों के बावजूद भी वे अपने आप को कैसे
मजबूत बनाएं रखते हैं।
माई मनीषा महंत - संघर्षमय जीवन का किन्नरों की
मानसिकता पर बहुत ही बुरा असर पड़ता है,जिसके कारण वे कठोर दिल के हो जाते हैं और
कई बार तो दूसरों की भावनाओं को भी नहीं समझ पाते। लेकिन स्थिति को बदलने के लिये
आम लोगों को किन्नरों के साथ सामान्य व्यवहार करना होगा,ताकि उनमें भी इंसानियत
जिंदा रहे। किन्नरों के कठोर सा कमजोर मिजाज के लिए हमें और आपकों
मिलकर प्रयास करना होगा. और ये सब
ताने देने से नही,बल्कि इंसानियत दिखाने से होता है।
14. मिलन
बिश्नोई- बढ़ती बेरोजगारी के कारण युवाओं का मानसिक संतुलन काफी हद तक हम
बिगड़ता देख रहे हैं कुछ युवाओं को सुसाइड करते हुए भी देख रहें है। तो किन्नर
युवाओं की क्या स्थिति हैं और वे स्वयं मानसिक संतुलन किस प्रकार बनाएं रखते हैं?
माई मनीषा महंत - बेरोजगार युवाओं की तरह किन्नर भी आत्महत्या करते हैं और
इसका आकड़ा भी चौंकाने वाला है।लेकिन सामाजिक रूप से इन मामलों को दबा दिया जाता
है और सामाज इन मामलों को बाहर आने ही नहीं देना चाहता। ये सब बचपन से ही मानसिक
तनाव,अकेलापन ओर हर दिन परिवार एवं लोगों के तानों के कारण होता है। मैं बिल्कुल
नहीं कहूंगी कि इस मामले में किन्नर समाज बहुत मजबूत है।
15. मिलन बिश्नोई- साहित्य में किन्नरों की गुरु
परम्पराओं का उल्लेख किया गया है। मैं आपसे जानना चाहती हूँ कि वे शिष्य को किस
आधार पर और कैसे बनाते है?
माई मनीषा महंत - मुझे यह बताते हुए बिल्कुल गर्व होता है कि किन्नर समाज
में गुरू-शिष्य परम्परा आज भी जीवित है ओर आज भी इसका वैसे ही पालन भी होता है।
किन्नर समाज में शिष्य बनाने के लिए शिष्य बनने वाला पात्र उस डेरे (किन्नरों का
घर) के नियमों का पालन करने में सक्षम हो तो कुछ सामाजिक रीति-रिवाजों के साथ उसे
शिष्य मान लिया जाता है।जैसे किसी को शिष्य बनाने से पहले उसे नई दुल्हन की तरह ही
सात दिन तक हल्दी यानि उबटन लगाई जाती है। फिर उसे तैयार करके अपने शहर भर के
प्रमुख मंदिरों में पूजा के लिए ले जाते है। फिर सभी उसे उपहार देते हैं और गुरू
भी कुछ उपहार देकर उसे शिष्य मान लेती है।
16. मिलन बिश्नोई- किन्नर समाज के रीति-रिवाज और संस्कारों के बारें में जानना चाहती हूँ।
माई मनीषा महंत - किन्नर समाज में अनेकों धर्म,संप्रदाय और विचारधाराएं
है। जो हर राज्य में अलग-अलग है। जैसे कि हम हरियाणा-पंजाब के किन्नर राजाओं के
दरबारी किन्नर हैं ओर हमारे पास जो पुराने दस्तावेज है,वो भी राजाओं द्वारा बनाए
गए दस्तावेज है। इसलिए हमारी बहुत परम्पराएं राजसी परम्पराओं से मिलती-जुलती है।
प्रत्येक राज्य की अपनी अलग परम्पराएं और मान्यताएं है,जिन्हें शब्दों में बयां
नहीं किया जा सकता । अकेले हरियाणा-पंजाब में सूफी विचारधारा से संबंधित है। बाकी
जो जिस धर्म की आस्था रखता है, वो उसी के मुताबिक ही चलता है। हालांकि किन्नरों
में इस्लामीकरण भी धड़ल्ले से हो रहा था, जिसमें किन्नर अखाड़ा बनने के बाद बहुत
तेजी से कमी आई है।
17. मिलन बिश्नोई -हमें साहित्य में पढ़ने को मिलता
है कि किन्नर की मृत्यु के पश्चात शव को मारते-पीटने है और शव को रात में दफनाने
ले जाते है क्या ऐसा होता है?
माई मनीषा महंत - अब पता नहीं कि ऐसी अफवाह कौन फैलाता है कि किन्नर समाज
रात में शव यात्रा निकालता है। उसे मारते-पीटते भी हैं, ये सुनने में ही इतना
असभ्य लगता है तो कोई ऐसा कैसे कर सकता है। जब किसी किन्नर की मौत होती है तो
अंतिम संस्कार में उसके घरवाले ओर उसके आस-पड़ोस वाले भी शामिल होते हैं,तो जिस
इंसान,परिवार या मौहल्ले–पड़ोस वाले ने किसी मरने वाले के साथ सारी उम्र बिताई हो।
तो वे उसकी देह के साथ ऐसा कैसे करने दे सकते हैं, वो भी तब जब आप भारत जैसे
लोकतांत्रिक देश में रहते हो,जहाँ संविधान ही सर्वोपरि है।ये सिर्फ एक अफवाह
है,जिसे साहित्यकारों,कहानीकारों और फिल्म वालों ने फैलाया है।
18. सामान्य समाज की तरह किन्नर समाज में भी जातिवाद होता हैं?
माई मनीषा महंत - बिल्कुल! किन्नर समाज में भी जातिवाद होता है ओर भेदभाव भी बराबर होता है। लेकिन वो बात अलग है कि गुरू-शिष्य परंपरा के कारण कोई इसके खिलाफ आवाज नहीं उठा सकता। और अगर इसके खिलाफ उठाकर कानून का दरवाजा खटखटा भी दे तो पुलिस कोई उचित जांच नहीं करती। इसलिए मैं बिल्कुल सच से मुँह नहीं मोड़ सकती,ऐसा हमेशा से होता आया है। बेशक कोई किन्नर समुदाय समाज इससे कितना भी मुँह मोड़ने का नाटक कर ले।
माई मनीषा महंत - बिल्कुल! किन्नर समाज में भी जातिवाद होता है ओर भेदभाव भी बराबर होता है। लेकिन वो बात अलग है कि गुरू-शिष्य परंपरा के कारण कोई इसके खिलाफ आवाज नहीं उठा सकता। और अगर इसके खिलाफ उठाकर कानून का दरवाजा खटखटा भी दे तो पुलिस कोई उचित जांच नहीं करती। इसलिए मैं बिल्कुल सच से मुँह नहीं मोड़ सकती,ऐसा हमेशा से होता आया है। बेशक कोई किन्नर समुदाय समाज इससे कितना भी मुँह मोड़ने का नाटक कर ले।
19. मिलन बिश्नोई - किन्नर समाज में बधाई देना,रेल
में भीख मांगना, पूजा ...इत्यादि काम को किस आधार पर बाँटा जाता है ?
माई मनीषा महंत - किन्नर समाज में काम बाँटने जैसी कोई बात नहीं होती, हाँ
गुरु-शिष्य परम्परा के अधीन कार्यक्षेत्र जरूर बांटा जाता है। बिल्कुल उसी आधार पर
जैसे कोई पुत्र अपने पिता की संपत्ति के
आधार पर जैसे कोई आपस में बाँटते हैं। पूजा-पाठ अपनी आस्था ओर मान्यताओं के हिसाब
से करते है।
20. मिलन बिश्नोई - किन्नरों की संपति का बँटवारा
किस आधार पर होता है?
माई मनीषा महंत - किन्नरों की संपत्ति का बंटवारा आम लोगों की तरह ही होता
है,जितनी इंसान की संतान होती है उतनी संपत्ति उनकी संतान को बराबर हिस्सों में
बाँटकर दी जाती है। वैसे ही गुरू के जितने शिष्य होगें उसी हिसाब से संपत्ति सब
चेलों में बराबर बाँट दी जाती है वैसे भी संपत्ति के नाम पर किन्नरों के पास बस वो
इलाका होता है, जिसमें वे सब बधाई वगैरह माँगने के लिए जाते है। तो बस उसे आपस में
बराबर बांट लेते है।
21. मिलन बिश्नोई - आप अक्सर कहती रहती है कि मैं
अभी बधाई लेने जा रही हूँ तो क्या आप अपनी बधाई का हिस्सा गुरु को भी देती है?
माई मनीषा महंत - हाँ! बिल्कुल,अपनी कमाई का कुछ हिस्सा गुरु को भी देते हैं,लेकिन स्वेच्छा से
देते हैं। कुछ गुरु जबरदस्ती अपने चेले से कुछ हिस्सा लेते है, हालांकि कहीं-कहीं
ऐसी घटना भी सामने आती है कि गुरु चेले से कुछ अधिक माँग करते है।लेकिन मैं मानती
हूँ कि गुरु को कुछ हिस्सा देना, उनको सम्मान देने के बराबर होता है।क्योंकि
वृद्धावस्था में गुरु चेले के द्वारा दिए
जाने वाले रूपयों पर ही निर्भर होती है,जिससे वो अपनी दवाई और बाकी जरूरतों को
पूरा करती है।
22. मिलन बिश्नोई- जैसे महिला और पुरूष के लिए अलग-अलग
विशेषज्ञ होते हैं इस तरह अस्पताल में आपके किन्नर समाज के लिए भी कोई अलग
सुविधाएं उपलब्ध है?
माई मनीषा महंत - नही! अस्पताल में अलग से कोई सुविधा नहीं मिलती
और कई बार डॉक्टर हमें गंभीरता से भी नहीं लेते और इलाज करते हुए भी कतराते हैं।
23. मिलन बिश्नोई-
किन्नर समाज में किस प्रकार के अनुशासन और दण्ड का प्रावधान हैं
इसके बारें में थोड़ा जानना चाहती हूँ?
माई मनीषा महंत- अनुशासन हर किन्नर डेरे में अलग-अलग तरीके से लागू किए
जाते हैं और उनमें नियम एवं स्थिति अलग-अलग हो सकती हैं, लेकिन दण्ड का प्रावधान
एक जैसा ही है। बस ये इस बात पर निर्भर करता है कि अपराधी ने अपराध कैसा किया
है,कुछ अपराध में मात्र रूपयों का दण्ड देकर अपराधी को माफ कर दिया जाता है। वहीं
कुछ अपराधों में सामाजिक बहिष्कार भी कर दिया जाता है या उसे अपने डेरे से निकाल
देते है।
24. मिलन बिश्नोई- जैसे लड़कियो के लिए कुछ स्कूल
अलग होते है तो क्या आप नहीं चाहते कि इस तरह किन्नर बच्चों को भी अलग शिक्षा दी
जाए।यानि आप वर्तमान में किन्नर बच्चों की शिक्षा को लेकर सरकार से क्या अपेक्षाएं
रखते हैं?
माई मनीषा महंत - हम किन्नर बच्चों के भविष्य,शिक्षा एवं सुरक्षा को लेकर
बेहद गंभीर हैं, लेकिन अलग स्कूल-कॉलेज के खिलाफ हैं। हम चाहते हैं कि किन्नर समाज
मुख्यधारा से जुड़े। लेकिन आप अगर उन्हें सबसे अलग रख कर शिक्षा और सहूलतें देगें
तो आप आम लोगों एवं किन्नरों के तालमेल बैठाने की बजाय उन्हें मानसिक और शारीरिक
रूप से अलग कर देगें। जो कि पहले से ही किन्नर समाज की मुख्यधारा से कटा हुआ है,
इसलिए अलग स्कूल, कॉलेज बनाने के बजाय, किन्नरों को आम बच्चों के साथ ही शिक्षा दी
जाए,ताकि सब एक-दूसरे को आपस में समझ पाएं और एक-दूसरे की भावनाओं को समझ सकें। बस
सरकार से मांग है कि किन्नरों को शिक्षा से जोड़ने के लिए अधिक से अधिक और प्रयास
किए जाए|
25. मिलन बिश्नोई- अंतिम सवाल के साथ आप साहित्यकारों और शोधार्थियों को क्या संदेश देना
चाहती है?
माई मनीषा महंत- साहित्यकारों एवं शोधार्थियों से मेरा यही कहना है कि
मात्र डिग्री ओर प्रोजेक्ट पूरा करने एवं किताबें लिखने तक सीमित ना रहे, बल्कि
चाहे सामाजिक या कानूनी कोई भी लड़ाई हो। आप किन्नरों को उसमें सहयोग करें एवं
सरकार को उनकी मानसिक,सामाजिक,शारीरिक और आर्थिक स्थिति के बारें में अवगत करवाएं,
क्योंकि किन्नरों से ज्यादा किन्नर समाज को आप जानते हैं आपने उनकों शब्दों में जिया
भी है और शब्दों में समाया भी है।


मिलन जी, आपको बहुत-बहुत हार्दिक शुभकामनाएं और बधाई कि आप बहन माई मनीषा महंत जी का साक्षात्कार कर पाईं । बहुत सुंदर साक्षात्कार है। इसके लिए आपको तथा बहन मनीषा महंत जी को भी नमन करता हूं ।
जवाब देंहटाएंसुभाष अखिल ।
जवाब देंहटाएंहार्दिक आभार एवं धन्यवाद सर 👏 आपकी प्रतिक्रिया पढ़कर बहुत अच्छा लगा मुझे सर । आप जैसे बहुत कम लोग होतेहैं जो इस तरह हमेशा शोधार्थियों को प्रोत्साहित करते हो। जल्द ही सर दरमियाना उपन्यास की समीक्षा भेजती हूं।
जवाब देंहटाएंप्रयाश अच्छा है।
जवाब देंहटाएंbahut acha! didi
जवाब देंहटाएंaap paryas sarahneeya hai...
Effective discussion
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जवाब देंहटाएंबहुत ही अच्छा लगा आपको पढ़कर , विकलांगता की समस्या से जुड़े कहानी और उपन्यासों का अध्ययन करना चाहता हूँ ।
कृपया यदि नाम बताने का कष्ट करें तो आपका आभार रहेगा 💐
सधन्यवाद
अभिमन्यु आनंद
बहुत बढ़िया
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