सोमवार, 27 फ़रवरी 2023

न लव न प्रीत : हिंसा का गीत-ऋषभदेव शर्मा


#डेलीहिंदीमिलाप

आखिर पंजाब के अजनाला की एक अदालत ने  अपहरण के मामले में खालिस्तान समर्थक कट्टरपंथी उपदेशक अमृतपाल सिंह के सहयोगी लवप्रीत सिंह उर्फ तूफान  को रिहा करने का आदेश सुना ही दिया!  इससे यह लगना स्वाभाविक है कि या तो मामले में सचमुच दम नहीं था, या पुलिस और सरकारी पक्ष ने ठीक से पैरवी नहीं की। याद रहे कि यह वही लवप्रीत सिंह है जिसे रिहा कराने के लिए इससे एक दिन पहले ही अमृतपाल सिंह  के हज़ारों समर्थकों ने  पुलिस थाने में हंगामा किया था और  बैरिकेड तोड़ डाले थे। उनके हाथों में तलवारें और बंदूकें थीं। उनके साथ संघर्ष के दौरान 6 पुलिसकर्मी घायल हो गये थे। इसके अलावा ‘वारिस पंजाब दे’ नामक संगठन के अध्यक्ष अमृतपाल सिंह ने अपने समर्थक लवप्रीत सिंह की रिहाई को लेकर  एक ‘चेतावनी’ भी जारी की थी। यानी यह हंगामा हंगामा नहीं,  बल्कि पूर्व निर्धारित हमला था! 

वैसे पंजाब के पुलिस महानिदेशक ने अजनाला में हुई इस हिंसक घटना को लेकर  यह भी कहा बताते हैं कि अमृतपाल सिंह के समर्थकों ने 'पवित्र गुरु ग्रंथ साहिब' को ढाल के रूप में इस्तेमाल किया था और पुलिसकर्मियों पर कायरतापूर्ण तरीके से हमला किया था। दरअसल थाने में घुसने की कोशिश करने वाले अमृतपाल सिंह के आगे-आगे श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी का पावन स्वरूप भी चल रहा था। इसे देख कर पुलिस वाले ठिठक गए, वरना उनकी पूरी तैयारी थी। उन्होंने भीड़ को रोकने की कोशिश की, लेकिन श्रीगुरु ग्रंथ साहिब की 'बेअदबी' न हो जाए, इसलिए पुलिस वाले रास्ते से किनारे होते गए। अमृतपाल ने थाने में ही लंगर शुरू करवाने की भी धमकी दी थी। अगर पुलिस के निष्क्रिय बने रहने की वजह यह धार्मिक ढाल थी, तो यह भी बेहद चिंतनीय है। क्या पवित्र गुरु ग्रंथ साहिब को इस तरह ढाल बनाने को निंदनीय कृत्य नहीं कहा जाना चाहिए? धर्म के सहारे प्रशासन को पंगु बनाने का ऐसा दूसरा उदाहरण शायद ही मिले!

इसे सरकार का हिंसा और आतंक के आगे झुकना ही कहा जाएगा न कि इस हिंसक हमले के बाद दबाव में आई पंजाब पुलिस ने आरोपी को रिहा करने का ऐलान कर दिया और कोर्ट में लवप्रीत सिंह तूफान को केस से डिस्चार्ज करने की एप्लीकेशन दायर की, जिसके बाद कोर्ट से उसकी रिहाई के आदेश जारी हो गए! जिस तरह यह सब हुआ उससे यह अंदेशा होना भी सहज है कि कानून और व्यवस्था को कहीं हिंसा और आतंक ने बंधक तो नहीं बना लिया है! लेकिन सरकार ऐसा मानती नहीं दिखती। अचरज नहीं कि इस हिंसक घटना के बारे में मुंबई में एक पत्रकार के सवाल का जवाब देते हुए पंजाब के मुख्यमंत्री ने कहा कि - 'आप लोगों के पास यहाँ गलत जानकारी है। पंजाब में कानून-व्यवस्था नियंत्रण में है। पंजाब पुलिस सक्षम है!' यहाँ यह सवाल स्वाभाविक है कि,  इस 'सक्षम' पुलिस और सरकार के मौन साक्षी भाव से कट्टरवादी अमृतपाल सिंह और उसके समर्थकों के हौसले नहीं बढ़ेंगे क्या? और कि, कहीं यह घटना पंजाब में एक और भिंडरावाले के उदय का संकेत तो नहीं है? 

कहना न होगा कि इस घटना से पंजाब में खालिस्तान समर्थक समूहों की बढ़ती ताकत का पता चलता है। पंजाब सरकार से उम्मीद की जानी चाहिए कि वह इसे हल्के में नहीं लेगी और गंभीरता से इस कट्टरवादी उभार का समाधान खोजेगी। अन्यथा ये तत्व आने वाले समय में केवल पंजाब ही नहीं, बल्कि पूरे देश की शांति, सुरक्षा और अखंडता के लिए खतरा साबित हो सकते हैं। 000

मां को पत्र

 घर छोड़ने से पहले लिखा हुआ खत 


ए अम्मा! साँझ को टिरेन पकड़नी है! इस्टेसन दूर है, तो अभई निकल रहे हैं! बलउ के टेक्टर से चले जाएंगे! थोड़ी पहले निकल रहे हैं, जानते हैं न, की जब हम झोला टांगते है तुम्हरे सामने तो लगती हो रोने, फिर टिरेन में यात्रा और मुश्किल लगने लगती है। आलू की सब्ज़ी और 7 रोटी बना के बाँध लिए हैं, थोड़ा चना और गुड भी रखे हैं! बाहर नलके से पानी भर लेंगे! दवाई ला दिए हैं, रसोई वाले ताखा पर है, उठा लेना नहीं तो सिता जायेगी! और समय समय से खाना भी है! गोली सफ़ेद वाली, खाली पेट सुबह! बाकी की संतरी रंग और चौकोर वाली सुभे साम। तुम्हारा कपड़ा धो के पसार दिए हैं! शाम को जागना तो उठा लेना! बाबूजी सुबह किराया भाड़ा दे दिए थे, तो उसका टेंसन न लेना! उनको कह दिए थे की निकल जाएंगे दुपहर में! बाकी खाता में पइसा पड़ा है, काम चल जाएगा इस महीने। मोटकी रजाई घाम दिखा के बड़के बक्सा में, और तुम्हारे सारे सुइटर बाबूजी के सुइटर भी उसमें ही रखे हैं! शाल दुशाला सब साफ़ है! निकाल के ओढ़ पहिन लेना! तुम्हारी जूती मोची से सिलवाय लाये थे! वहीँ आँगन में पन्नी में लपेट के रखे हैं! खाना बनाना हो तभी उतारना! नहीं तो पहनी रखना। 10 किलो कोयला, 10 किलो शीशम की लकड़ी चीर ऊपर कमरे में रख दिए हैं! भगेलू को 5 10 रूपया दे के उतरवा लेना! तुम्हारे फोन में 200 रुपया का रिचार्ज करवा दिए हैं, जब मन करे फोन घुमा लेना! और रोना मत, खाना पीना समय से खाना! जल्दी नौकरी लेकर लौटेंगे। तुम्हारे जागने तक हम टिरेन में बइठ गए रहेंगे! तो ख़त पढ़ के एक आँसू मत रोना! पैर छुए हैं, आसिरबाद भेज देना! 


~ तुम्हारे बेटे/राजकुमार/लल्ला/करेजा का टुकड़ा!


लेखक -अक्षत आदित्य

रविवार, 26 फ़रवरी 2023

5 year Completed journey in Bangalore#ArvindVishnoi

 



What an incredible ride it has been. I relocated to Bangalore leaving behind Hyderabad, the only city where I spent more than 5 years. The city where I spent my teenage years, which transformed me from a carefree child to a responsible adult, the city where I understood and experienced the meaning of life, struggle, happiness, friendship, hard work, failure & success and the place where I eventually wanted to settle down in the long term.

Although, since my father served in Army, I have had experience of relocating after every few years leaving behind everything we build. However, this time it was different as I’ve entered into those impressionable years when you get emotionally attached to the place, relationships, home and much more. And leaving all these behind was unimaginable.

Therefore, I convinced myself that stay in Bangalore is temporary and I’ll return to Hyderabad at the earliest possible. With this thought in mind and with a heavy heart, here I was in a new city trying to make a temporary place for myself. Fast forward to today and I’m deeply in love with this place, people, cosmopolitan culture.

During initial days, my mind always used to wander off from the job I was doing. I wanted to explore other career opportunities; however I didn’t have the discipline and risk capability to change the industry and re-start from the scratch in other field. Moreover, over a period of time I started loving sales and account management roles, and thus continued in the same field.

When I finally settled my accommodation and career interest, I started getting a nagging feeling that I was missing something in my life. One day I just woke up early in the morning and ran from Domlur (my house) to Cubbon park, a distance of around 6K. That was the best feeling I had after a long time and there was no looking back since then.

After a month of practice, I registered for my first hill run half marathon in the outskirts of Bangalore where I secured 2nd place. Then came my first major challenging hill trail run in Coorg where I secured 4th place in 30K with ~2000 M elevation. It was this run which paved my entry into the mountain trail ultra running community. I met many professional and seasoned runners from all over India and other countries. Listening to their ultra run experiences and stories of grit, determination and passion gave goose bumps. This further fueled my passion to pursue ultra trail running. In last 4 years, I’ve successfully completed 10 professional mountain/ hill trail run’s across the country with distance ranging from 50K to 100K with elevation of 2000 to 4000 meters. In between, I also got the opportunity to travel to Hyderabad to successfully complete my 1st half-triathlon (1.8K Swim, 90K Cycle and 21K Run in 7:20 Hrs).

Bangalore is strategically located from where we can explore the entire south India. This gave me the opportunity to explore and experience places using different modes of transport – train, bus, drive especially bike rides. I travelled to beautiful hill stations such as Ooty, Coorg, Wayanad, Chickmangaluru, Munnar, Yercaud; amazing beaches in Kanyakumari, Pondicherry, Karaikal, Goa; Historical places with famous temples having intricate architecture located in Madurai, Thanjavur, Kumbakonam, Thiruvarur, and Hampi. The thrill of exploring new places especially hill stations on the bike ride trips, trekking have been my most memorable moments so far.

I feel gratitude to all the people, friends, family and colleague who have helped and supported me in this journey. With so many things from my bucket list yet to be ticked, I’m looking ahead for the exciting times.    

Thanks you!

Arvind Vishnoi

arvindkumarvishnoi@gmail.com

मंगलवार, 21 फ़रवरी 2023

राजस्थान की बेटी डॉ. मिलन बिश्नोई ने 12 वें विश्व हिंदी सम्मेलन फ़िजी में ‘भारतीय ज्ञान परम्परा की धरोहर:गुरु जांभोजी की सबदवाणी में पर्यावरण-चिंतन’ विषय पर शोध-पत्र प्रस्तुत किया

 डॉ. मिलन बिश्नोई को अखिल भारतीय बिश्नोई महासभा, राजस्थान ने अपने प्रतिनिधि के तौर पर 12 वां विश्व हिंदी सम्मेलन,फ़िजी में भेजा गया । माननीय देवेन्द्र जी बुड़िया साहब ने प्रधान का कार्यकाल संभालने के पश्चात शिक्षा, समाज और संस्कृति तीनों को विश्वस्तर पर पहचान दिलाने के लिए नित-नये प्रयास किए है । उन्होंने दुबई में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शिखर सम्मेलन का सफल आयोजन करने के पश्चात भारत की प्रथम बिश्नोई बेटी डॉ. मिलन बिश्नोई को जांभाणी साहित्यिक प्रचार हेतु 12 वें विश्व हिंदी सम्मेलन महासभा की ओर से भेजा गया । बिश्नोई नारी शक्ति को विश्वस्तर पर पहुँचाने के लिए यह महासभा की ओर से सबसे बड़ा पहला कदम उठाया गया है । जो 21 वीं सदी में अखिल भारतीय बिश्नोई महासभा अपने समाज की बेटियों के लिए सराहनीय योगदान दे रही हैं ।

12 वां विश्व हिंदी सम्मेलन विदेश मंत्रालय भारत सरकार और फ़िजी सरकार के द्वारा प्रशान्त महासागर के फ़िजी के नांदी में14 से 17 फरवरी 2023 में आयोजित किया गया ।कार्यक्रम का शुभारंभ भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर, फिज़ी के राष्ट्रपति रातू विल्यम मैवलीली काटोनिवेरे ने किया ।  इसके गृहराज्य मंत्री श्री अजय कुमार मिश्र, राज्य मंत्री वी. मुरलीधरन तथा फ़िजी के राष्ट्रपति, उपप्रधानमंत्री सहित लगभग तीस देशों के प्रतिनिधि मौजूद तथा  1000 हजार से अधिक प्रतिभागी उपस्थित रहे ।

इस सम्मेलन का मुख्य विषय- पारम्परिक ज्ञान से आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस थी । इस थीम के अनुरूप डॉ. बिश्नोई ने भारतीय ज्ञान परम्परा की धरोहर : गुरु जांभोजी की सबदवाणी में पर्यावरण –चिंतन विषय पर शोध पेपर प्रस्तुत किया । इन्होंने बताया कि भारतीय ज्ञान परम्परा वसुधैव कुटुम्बकम की भावना के साथ सर्वेभवन्तु सुखीन् की बात करती है और इन पंक्तियों का चरितार्थ करने के लिए हमें मन और मस्तिष्क की आंतरिक यात्रा करने की आवश्यकता है । भारतीय संत परम्परा को यदि देखा जाए तो उन्होंने समूचे विश्व में मानवकल्याण को ध्यान में रखते हुए आंतरिक तत्व-चिंतन पर विशेष जोर दिया है । यदि उत्तर भारत की संत परम्परा में गुरु जांभोजी की सबदवाणी को पढ़ा समझा जाए ज्ञान परम्परा को उजागर करने वाला सर्वश्रेष्ठ साहित्यिक ग्रंथ है। क्योंकि जांभोजी की सबदवाणी केवल उपदेशात्मक नहीं है बल्कि समाज को मानव कल्याण, पर्यावरण संरक्षण तथा वन्यजीवों का संरक्षण और भाषा व संस्कृति संरक्षण करने का काम करती है । यदि आधुनिक संदर्भ में कृत्रिम मेधा के साथ तारतम्यता स्थापित करके देखा जाए तो गुरुदेव जांभोजी ने 550 साल पहले पर्यावरण की चिंता करते हुए 29 नियमों की स्थापना की थी । अर्थात् भारतीय परम्परा बड़ी सुंदर और सुलझी हुई तथा प्रगाढ़ है इसे संपूर्ण विश्व जानता है। हमारे यहां पेड़ों के लिए मां अमृतादेवी के दो बेटियों सहित  363 बिश्नोईयों ने बलिदान दिया गया है ।आज भी बिश्नोई समाज पर्यावरण के प्रति अत्यंत सजग है और आवश्यकता पड़ने पर अपना बलिदान करने से पीछे नहीं हटता । अंत में बिश्नोई ने यह भी कहा कि ज्ञान परम्परा के माध्यम से यदि आगे बढ़ने का प्रयास करें तो भाषा और संस्कृति का अस्तित्व बनाएं रखना अत्यंत आवश्यक है। भाषा को केवल अभिव्यक्ति का माध्यम  न समझे क्योंकि भाषा राष्ट्र और संस्कृति का भी मार्ग प्रशस्त करती हैं । तो विश्व हिंदी सम्मेलनों में पहली बार ऐसा हुआ कि जिसमें ज्ञान-परम्परा के माध्यम से आधुनिकता की ओर बढ़ने सुअवसर दिया गया ।

इस 12 वें विश्व हिंदी सम्मेलन में डॉ. बिश्नोई के साथ उनके जीवसाथी श्री अरविंद कुमार विश्नोई ने जांभाणी साहित्य अकादमी ओर से फ़िजी की हिंदी बोर्ड की अध्यक्षा रोहिनी कुमार को साहित्य भेंट करके वहाँ के पाठ्यक्रम में भारतीय माँ अमृतादेवी की बलिदान गाथा को जोड़ने की इच्छा जाहिर की तब रोहिनी ने इसे लागू करने का भरोसा दिलाया । तथा भारत सरकार के गृहराज्य मंत्री श्री अजयकुमार मिश्र को भी जांभाणी साहित्य भेंट किया गया।

डॉ. मिलन बिश्नोई वर्तमान में कर्नाटक के खाजा बंदानवाज विश्वविद्यालय में सहायक आचार्य के पद पर कार्यरत हैं ।  वे इससे पहले 11वें विश्व हिंदी सम्मेलन,मॉरिशस में भी अपना शोध पत्र प्रस्तुत कर चुकी थी । तो लगातार दूसरी बार विश्व हिंदी सम्मेलनों में भाग लेने वाली प्रथम बिश्नोई समाज की बेटी है । पारिवारिक दृष्टिकोण से अध्यापक की बेटी की शिक्षा प्रारम्भिक शिक्षा सरकारी स्कूल और स्नात्तक की शिक्षा दुरस्थ शिक्षा के माध्यम से हुई । शादी के पश्चात  मिलन बिश्नोई को देश के शीर्षस्थ विश्वविद्यालयों से शिक्षा प्राप्त करने का सौभाग्य मिला । आज मिलन बिश्नोई समाज की बेटी दक्षिण भारत के सुदूर प्रांत तमिलनाडु,तेलगांना व कर्नाटक में एक जानी-मानी साहित्कार व शोधार्थी और अध्येता के रूप में जानी जाती है । मिलन बिश्नोई ने विश्वस्तर पहुंचने का श्रेय उनके पिता श्री जगराम बिश्नोई, जीवनसाथी श्री अरविंद कुमार विश्नोई,ससुर लादूरामजी बिश्नोई और अखिल भारतीय बिश्नोई महासभा के प्रधान देवेन्द्र जी बुड़िया साहब को दिया हैं । उन्होंने बताया कि मुझ जैसी ग्रामीण प्रांत और जालोर की सबसे कम साक्षरता दर वाली बेटी यदि विश्वस्तर पर गुरुदेव जंभेश्वर व बिश्नोई संस्कृति का प्रचार करने जा सकती है तो मैं मानती हूँ कि आने वाले समय हमारी बहने बहुत आगे जाएगी ।