#डेलीहिंदीमिलाप
आखिर पंजाब के अजनाला की एक अदालत ने अपहरण के मामले में खालिस्तान समर्थक कट्टरपंथी उपदेशक अमृतपाल सिंह के सहयोगी लवप्रीत सिंह उर्फ तूफान को रिहा करने का आदेश सुना ही दिया! इससे यह लगना स्वाभाविक है कि या तो मामले में सचमुच दम नहीं था, या पुलिस और सरकारी पक्ष ने ठीक से पैरवी नहीं की। याद रहे कि यह वही लवप्रीत सिंह है जिसे रिहा कराने के लिए इससे एक दिन पहले ही अमृतपाल सिंह के हज़ारों समर्थकों ने पुलिस थाने में हंगामा किया था और बैरिकेड तोड़ डाले थे। उनके हाथों में तलवारें और बंदूकें थीं। उनके साथ संघर्ष के दौरान 6 पुलिसकर्मी घायल हो गये थे। इसके अलावा ‘वारिस पंजाब दे’ नामक संगठन के अध्यक्ष अमृतपाल सिंह ने अपने समर्थक लवप्रीत सिंह की रिहाई को लेकर एक ‘चेतावनी’ भी जारी की थी। यानी यह हंगामा हंगामा नहीं, बल्कि पूर्व निर्धारित हमला था!
वैसे पंजाब के पुलिस महानिदेशक ने अजनाला में हुई इस हिंसक घटना को लेकर यह भी कहा बताते हैं कि अमृतपाल सिंह के समर्थकों ने 'पवित्र गुरु ग्रंथ साहिब' को ढाल के रूप में इस्तेमाल किया था और पुलिसकर्मियों पर कायरतापूर्ण तरीके से हमला किया था। दरअसल थाने में घुसने की कोशिश करने वाले अमृतपाल सिंह के आगे-आगे श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी का पावन स्वरूप भी चल रहा था। इसे देख कर पुलिस वाले ठिठक गए, वरना उनकी पूरी तैयारी थी। उन्होंने भीड़ को रोकने की कोशिश की, लेकिन श्रीगुरु ग्रंथ साहिब की 'बेअदबी' न हो जाए, इसलिए पुलिस वाले रास्ते से किनारे होते गए। अमृतपाल ने थाने में ही लंगर शुरू करवाने की भी धमकी दी थी। अगर पुलिस के निष्क्रिय बने रहने की वजह यह धार्मिक ढाल थी, तो यह भी बेहद चिंतनीय है। क्या पवित्र गुरु ग्रंथ साहिब को इस तरह ढाल बनाने को निंदनीय कृत्य नहीं कहा जाना चाहिए? धर्म के सहारे प्रशासन को पंगु बनाने का ऐसा दूसरा उदाहरण शायद ही मिले!
इसे सरकार का हिंसा और आतंक के आगे झुकना ही कहा जाएगा न कि इस हिंसक हमले के बाद दबाव में आई पंजाब पुलिस ने आरोपी को रिहा करने का ऐलान कर दिया और कोर्ट में लवप्रीत सिंह तूफान को केस से डिस्चार्ज करने की एप्लीकेशन दायर की, जिसके बाद कोर्ट से उसकी रिहाई के आदेश जारी हो गए! जिस तरह यह सब हुआ उससे यह अंदेशा होना भी सहज है कि कानून और व्यवस्था को कहीं हिंसा और आतंक ने बंधक तो नहीं बना लिया है! लेकिन सरकार ऐसा मानती नहीं दिखती। अचरज नहीं कि इस हिंसक घटना के बारे में मुंबई में एक पत्रकार के सवाल का जवाब देते हुए पंजाब के मुख्यमंत्री ने कहा कि - 'आप लोगों के पास यहाँ गलत जानकारी है। पंजाब में कानून-व्यवस्था नियंत्रण में है। पंजाब पुलिस सक्षम है!' यहाँ यह सवाल स्वाभाविक है कि, इस 'सक्षम' पुलिस और सरकार के मौन साक्षी भाव से कट्टरवादी अमृतपाल सिंह और उसके समर्थकों के हौसले नहीं बढ़ेंगे क्या? और कि, कहीं यह घटना पंजाब में एक और भिंडरावाले के उदय का संकेत तो नहीं है?
कहना न होगा कि इस घटना से पंजाब में खालिस्तान समर्थक समूहों की बढ़ती ताकत का पता चलता है। पंजाब सरकार से उम्मीद की जानी चाहिए कि वह इसे हल्के में नहीं लेगी और गंभीरता से इस कट्टरवादी उभार का समाधान खोजेगी। अन्यथा ये तत्व आने वाले समय में केवल पंजाब ही नहीं, बल्कि पूरे देश की शांति, सुरक्षा और अखंडता के लिए खतरा साबित हो सकते हैं। 000
