बैंगलोर के प्रसिद्ध 'कब्बन पार्क' को 1870 में मैसूर के कार्यवाहक सर जोन मिडे के नाम पर मीड्स पार्क बनवाया गया था।सर मार्क कब्बन को पार्क की लंबे समय तक सेवा करने वाले के रूप में माना जाता है। इसलिए इस पार्क का नाम बदलकर आयुक्त अधिकारी के नाम पर 'कब्बन' पार्क नाम दिया गया। यह बैंगलोर का प्रमुख लैंडमार्क होने के साथ-साथ शहर के प्रशासनिक क्षेत्र में आता है।पार्क में महात्मा गांधी रोड़ और कस्तूरबा गांधी रोड़ तथा मेट्रो ट्रेन के द्वारा आसानी से जा सकते हैं।कहा जाता है पहले यह पार्क सिर्फ 100 एकड़ तक विस्तृत था। हालांकि बाद में इसे करीब 300 एकड़ में बढ़ा दिया गया यहां विभिन्न प्रकार की वनस्पति और जीव-जंतु का बेहतरीन नजारा देख सकते है।
इसके अलावा पार्क में कई सारी टोपियां और कुछ राजा महाराजाओं के स्टेच्यू और रंग-बिरंगे फूल देखने को मिलते हैं। पार्क के बीचों-बीच लाइब्रेरी भी है। कतारबद्ध में बहुत लंबे और अनेकों साल पुराने वृक्ष की खुबसूरती सबके मन को मोह लेती है। पार्क में बहुत सारे घने बांस के पेड़ और अनेकों खूबसूरत पौधों के बीच एक बड़े से दायरे में फैला हुआ पार्क बैंगलोर शहर की खुबसूरती बढ़ाने में चार चांद लगाता है।
इस पार्क को कर्नाटक सरकार के बागवानी विभाग द्वारा नियंत्रिण किया जाता है। यहां देश-विदेश के लोग सुबह टहलने, दौड़ने,योगा, साइक्लिंग और एक्सरसाइज करने के अलावा अपने पालतू कुत्तों को घूमाने के लिए भी लाते हैं।पार्क में बच्चों और बुजुर्गों के लिए अलग से व्यवस्था की गई है।समय-समय पर मैराथन,योगा, संगीत, नाटक जैसी गतिविधियां भी इस पार्क में होती रहती है। प्रकृति प्रेमी,शांत और चिंतनशील और फोटोग्राफर के लिए स्वर्ग-सी सुंदर जगह मानी जाती है।
अनेकों सफाईकर्मियों, सुरक्षाकर्मियों और वनस्पति वैज्ञानिकों को रोजगार के अवसर दिए गए हैं।भारत के प्रसिद्ध पार्क के दृष्टिकोण में '#कब्बनपार्क' को शीर्षस्थ स्थान पर देखा जा सकता है।-मिलन बिश्नोई
