शुक्रवार, 12 मार्च 2021
Happy women's day
Happy women's day -मिलन बिश्नोई(8.03.2021)
हम कोमल है कमजोर नहीं। हमारी कहानियां ही मेरी कामयाबी बनी है।
आज भी समाज और परिवार सवालों के कठघरों में कैदीहै।उन कठघरों में हमने सिसकि के साथ जीना सीखा है
और कभी ना चाहेंगे किसी को बंद करना।
फिर सवाल आज भी हमसे पूछे जाते है।
तुम से कभी ना पूछे जाएंगे तुम्हारे गुनाहों का हिसाब। कामयाबी के मुकाम पर हम सदैव तुम्हें याद करते रहेंगे।
लेकिन हमारा साथ और समर्पण/त्याग किसी नहीं दिखाया जाएगा।
समाज की निगाहों में आज भी परायी बेटी और परायी औरत के खांचे में धकेली हुई है।
अधिकारों की डोर सदैव पुरुष सत्ता के पास थी और रहेगी।हम खुश हैं हमारी जन्मजात प्रतिभाओं से और समाज के थपेड़ो से सीखें अध्यायों से।
आज भी दुर्गा और शक्ति के रूप में उपासक बने बैठे हो। लेकिन घर में कोई दुर्गा का अवतरण नहीं चाहता।
आज भी कुंती और द्रोपदी की कहानियां सुनाई जाती है
फिर उन्हें स्वीकारा नहीं जाता?
आज भी मां-पत्नी बनाने का अधिकार उन्हीं के हाथों में। आज भी हमारी इच्छा और आंकाक्षाओं की बलि चढाई जाती है।
हां फिर भी कहने को तो बहुत कुछ बदला है
निकलने लगी है चारदीवारी से बाहर औरतें।
वहां भी उनकी आकांक्षाओं और आत्मसम्मान की बलि चढ़ानी पड़ती है।
आज भी हमारा कपड़ों की स्टाइल से मूल्यांकन किया जाता है औरतों का। तुम्हारी जीवन शैली पर प्रश्न उठाना आज भी गुनाह है।
आप नकार नहीं सकते हमारी भूमिकाओं को
दो परिवार को जोड़ने वाली कड़ी हम ही बन गयी हैं।
जीवन भर पराये धन का बोझ वहन करने क्षमता हममें है।
उस परायेपन के बोझ को प्यार, स्नेह, विश्वास और सफलता के साथ उतारने की कोशिश करते हैं जीवन भर....
Happy women's day
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