शुक्रवार, 11 जून 2021

Hesaraghatta Lake Review in Hindi

हेसरघट्टा झील बैंगलोर की ताजे पानी की झीलों में से एक है। यह मानव निर्मित झील बैंगलोर के उत्तर-पश्चिमी भाग में शहर के केंद्र से लगभग 35 किमी की दूरी पर स्थित है। झील का निर्माण वर्ष 1894 में किया गया था। यह एक विशाल झील है जो 1000 एकड़ से अधिक क्षेत्र में फैली हुई है। यह पक्षी देखने वालों के बीच बहुत लोकप्रिय है क्योंकि यह उन कुछ मौजूदा स्थानों में से एक है जहां बड़ी संख्या में विदेशी पक्षियों को देखा जा सकता है.झील न केवल प्यारे पक्षियों के लिए बल्कि सुंदर परिवेश के लिए भी जानी जाती है, जो यह शहरी व्यस्त जीवन की हलचल से दूर कुछ पल बिताने के लिए एक आदर्श स्थान बनाती है। हेसरघट्टा झील, बैंगलोर का इतिहास- हेसरघट्टा झील की कल्पना तत्कालीन मैसूर राज्य के दीवान सर के. शेषाद्री अय्यर और मैसूर के मुख्य अभियंता एम.सी. हचिन्स ने की थी। इससे शहर की पेयजल आवश्यकताओं को पूरा करने के इरादे से बनाया गया था। झील 'अर्कावती' नदी से जुड़ी है जो कोलार जिले की नंदी पहाड़ियों से निकलती है। यह सदियों पुरानी झील प्रकृति पर हमलों का सामना करती रही है और विभिन्न प्रजातियों के पक्षियों को शांत वातावरण में आकर्षित करने में कामयाब रही है। हालांकि, झील के तल के सूखने के कारण स्थिति तेजी से बदल गयी है।अब पानी का एक छोटा-सा घेरा बचा है । बैंगलोर की सुन्दरता में योगदान- बैंगलोर की सुन्दरता बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान है।हेसरघट्टा झील की सुन्दरता अपने आप में अनोखी है। हरे-भरे घास के मैदानी परिवेश में पक्षियों का कलरव देखने को मिलता है।शहरी हाहाकार से दूर कुछ पल की शांति के लिए कार/स्कूटी से ड्राइव करके जा सकते हैं। रास्ते भर में विभिन्न प्रकार के पेड़-पौधों के बाद आम/फलों और हरी-भरी घास के बड़े-बड़े खेत-खलिहानों को देखने के बाद चेहरे पर अपने आप मुस्कुराहट छा जाती है।और झील के किनारे-किनारे चलते हुए अनेकों पक्षियों से रू-ब-रू होने का अवसर मिल जाता।ऐसी शांत और मनोरम दृश्य वाली जगह है ।इसके आसपास साइक्लिंग करने के लिए भी बहुत अच्छी खुली सड़क है स्वच्छंद होकर ट्राफिक की दुनिया से बाहर आकार साइक्लिंग करने और दौड़ने का आंनद ले सकते हैं। खासकर मानसून के दिनों में यहां की हरियाली ठंडी-ठंडी हवा के साथ बहुत खुबसूरत लगती है।-©मिलन बिश्नोई#सुखदानुभूति #🙏🙏#बैगलोरकीडायरी #10.06.2021Hesaraghatta Lake

शुक्रवार, 12 मार्च 2021

Happy women's day

Happy women's day -मिलन बिश्नोई(8.03.2021) हम कोमल है कमजोर नहीं। हमारी कहानियां ही मेरी कामयाबी बनी है। आज भी समाज और परिवार सवालों के कठघरों में कैदीहै।उन कठघरों में हमने सिसकि के साथ जीना सीखा है और कभी ना चाहेंगे किसी को बंद करना। फिर सवाल आज भी हमसे पूछे जाते है। तुम से कभी ना पूछे जाएंगे तुम्हारे गुनाहों का हिसाब। कामयाबी के मुकाम पर हम सदैव तुम्हें याद करते रहेंगे। लेकिन हमारा साथ और समर्पण/त्याग किसी नहीं दिखाया जाएगा। समाज की निगाहों में आज भी परायी बेटी और परायी औरत के खांचे में धकेली हुई है। अधिकारों की डोर सदैव पुरुष सत्ता के पास थी और रहेगी।हम खुश हैं हमारी जन्मजात प्रतिभाओं से और समाज के थपेड़ो से सीखें अध्यायों से। आज भी दुर्गा और शक्ति के रूप में उपासक बने बैठे हो। लेकिन घर में कोई दुर्गा का अवतरण नहीं चाहता। आज भी कुंती और द्रोपदी की कहानियां सुनाई जाती है फिर उन्हें स्वीकारा नहीं जाता? आज भी मां-पत्नी बनाने का अधिकार उन्हीं के हाथों में। आज भी हमारी इच्छा और आंकाक्षाओं की बलि चढाई जाती है। हां फिर भी कहने को तो बहुत कुछ बदला है निकलने लगी है चारदीवारी से बाहर औरतें। वहां भी उनकी आकांक्षाओं और आत्मसम्मान की बलि चढ़ानी पड़ती है। आज भी हमारा कपड़ों की स्टाइल से मूल्यांकन किया जाता है औरतों का। तुम्हारी जीवन शैली पर प्रश्न उठाना आज भी गुनाह है। आप नकार नहीं सकते हमारी भूमिकाओं को दो परिवार को जोड़ने वाली कड़ी हम ही बन गयी हैं। जीवन भर पराये धन का बोझ वहन करने क्षमता हममें है। उस परायेपन के बोझ को प्यार, स्नेह, विश्वास और सफलता के साथ उतारने की कोशिश करते हैं जीवन भर.... Happy women's day