सोमती/हरियाली अमावस्या की हार्दिक मंगलकामनाएं ❤️
#Positivity with spiritual strength.
# आध्यात्मिक इंसान बनना मुझे लगता है सबसे कठिन परीक्षा है। आजकल 'मुंह में राम बगल में छुरी' लेकर चलने वाले हर कदम पर मिल ही जाएंगे। लेकिन सच्चा आध्यात्मिक इंसान और उसकी शक्ति को ढूंढना असंभव है। पिछले कई सालों से पूजा-पाठ/यज्ञ से काफी दूरी बना ली थी बेशक जब किसी तकलीफ़ में होती थी तो ईश्वर को जरूर पुकार लगाती और वह मेरी सहायता भी शायद बिना सोचे समझे कर ही देता है। मुझे नहीं पता कि भगवान है या नहीं... लेकिन इतने सालों बाद मैंने यज्ञ(जोत) किया तो अंदर से एक सुकून आहट/शक्ति मिली उसको मैं शब्दों में बयां नहीं कर सकती।
# पिछले कई सालों से हास्टल ही अपना घर बन गया है इसलिए काफी फक्कड़/गैरजिम्मेदार बन गई थी । तो मेरे पंथ के उन्नतीस नियमों का पालन करने में शायद मैंने काफी भूल की है यह मैं कहने में संकोच भी महसूस कर रही हूं। आज सोचती हूं अगर मैं गुरुदेव जम्भेश्वर के बताए गए नियमों का पालन करती तो शायद आज जो हूं, उससे भी कई गुना अधिक अच्छी इंसान बनी रहती।आज तक मैं पर्यावरण/पशु-पक्षियों के लिए शायद बहुत कुछ कर सकती थी। क्योंकि हम भगवान का रूप प्रकृति/पर्यावरण/जीव-जानवर में ही देखते हैं। हमारे लिए वही राम/रहीम/खुदा है ।खैर लाकडाउन का वक्त चल रहा है जिससे सबके जीवन के काफी उतार चढ़ाव के अनुभवों को देखने/महसूस करने का अवसर मिला है। लाकडाउन के दौर में ही आज हरियाली/सोमती अमावस्या का आना अपने आप संयोग है।
#बिश्नोई समाज के लिए अमावस्या सबसे पवित्र दिन है ।इस दिन हम लोग गुरुदेव जम्भेश्वर की सबदवाणी का पाठ करते हुए यज्ञ करते हैं फिर खीर का भोग लगाते हैं। राजस्थान में प्रत्येक अमावस्या को बिश्नोई परिवारों में गेहूं के आटे की खीर बनती है।इस दिन विशेष रूप से जल्दी स्नान करके गाय के घी,छणा(गाय के सूखे गोबर), खेजड़ी के सूखे छाल, नारियल से मिट्टी की तापनी(कुंड) में हवन/यज्ञ (जोत) करते हुए सृष्टि के लिए मंगलकामना करते हैं।इस दिन हम गायों/पशु-पक्षियों को दाना-पानी देते हैं। वैसे यह हमारे जीवन के नित्य कर्म में हर दिन सुबह को सबसे पहले नहा-धोकर पक्षियों को दाना/पानी देकर यज्ञ(हवन)करना होता ही है। और फिर खाना बनाते है तो पहली रोटी गाय को/ दूसरी रोटी कुत्ते को देते हैं। लेकिन अमावस्या/पूर्णिमा को विशेष रूप गुड़/बाजरा और लड्डू बनाकर खिलाया जाता है। अमावस्या के दिन कोई भी खेत में खरपतवार नहीं करते। ना ही हम लोग इस दिन खेत की जुताई करते क्योंकि जमीन में बहुत सारे जीव है जो खुदाई /जुताई करने से मर जाते है।इस दिन हम वृक्ष लगाते हैं लेकिन हरे वृक्षों को भूलकर भी काटते नहीं ।और अमावस्या के दिन साबुन से कपड़े भी नहीं धोते ताकि चींटियां/कीड़े-मकोड़े ना मरे।खासकर अमावस्या के दिन कन्याओं को भोजन कराते हैं और उन्हें अंगवस्त्र भी भेंट करते हैं। अमावस्या हमारे लिए सबसे अच्छा और पावन दिन है अगर बाकी दिन उपवास करें या ना करें कोई फर्क नहीं पड़ता लेकिन अमावस्या के दिन उपवास हम लोग जरूर रखते हैं। यह दिन पूरी तरह हमारा जीव/जन्तु/पर्यावरण(पारिस्थितिकी) को समर्पित होता है। चलो आज से मैं भी एक सच्ची बिश्नोई बनने की शुरुआत करती हूं।-#MilanBishnoi